दोस्त की हॉट बहन अंजली

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प्रेषक : राज …

हैल्लो दोस्तों, में आज आप सभी को मेरा एक सच्चा सेक्स अनुभव बताने जा रहा हूँ, जिसमे मैंने बहुत जमकर मज़े लिए और में वो सब उस लड़की के साथ करके बड़ा खुश था। दोस्तों उस लड़की का नाम अंजली था, वो दिल्ली में रहकर एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करती है, उसकी उम्र करीब 30-31 साल के आसपास होगी। दोस्तों वो मेरे एक दोस्त की बहन थी, में उन दिनों अपने ऑफिस की तरफ से दिल्ली जा रहा था, मेरे दोस्त ने मुझसे कहा कि दिल्ली में मेरी बहन भी रहती है, तो तुम उसका कुछ सामान भी अपने साथ लेते जाना, वो अपनी किसी दोस्त के साथ एक कमरा किराए से लेकर रहती है। फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है तुम मुझे सामान दे जाना में सही जगह पर पहुंचा दूंगा और स्टेशन पर मेरा वो दोस्त आ गया और एक बैग में कुछ सामान, अंजली के घर का पता और मोबाईल नंबर दे गया। फिर में जी.टी एक्सप्रेस से सुबह 6 बजे दिल्ली पहुँचकर टेक्सी लेकर सीधे अंजली के घर चला गया, मैंने सोचा कि पहले अंजली का सामान दे दूँ क्योंकि ऑफिस तो दस बजे खुलेगा तो तब तक में उसका सामान देकर आ जाऊंगा। फिर में एक टेक्सी लेकर सीधा उसके घर चला गया और पहुंचकर मैंने उसके घर की घंटी बजाई। तभी अंदर से एक बड़ी ही सुरीली आवाज़ आई कौन है? और उसने इतना पूछकर दरवाजा खोल दिया।

फिर मैंने कहा कि में राज आपके भाई प्रेम का दोस्त हूँ, में ग्वालियर से आया हूँ और मुझसे आपके भाई ने बोला कि आपको देखता आऊं और में अपने साथ आपका कुछ सामान भी लाया हूँ। अब वो कहने लगी कि ओह नमस्कार आप अंदर आ जाओ बाहर क्यों खड़े हो? में उसको धन्यवाद कहकर अंदर आ गया। फिर अंजली ने मुझे सोफे पर बैठने का इशारा किया और में आपके लिए पानी लेकर अभी आती हूँ यह कहकर वो रसोई में चली गई, उस समय वो एक नाईट सूट में थी और बहुत सुंदर नजर आ रही थी और उसके संतरे जैसे बूब्स बिना ब्रा के झूलते हुए मुझे साफ नजर आ रहे थे। फिर जब वो पानी देने के लिए नीचे झुकी तब मैंने देखा कि उसके दोनों कबूतर संतरे के आकार में नजर आ रहे थे और में बड़ा चकित होकर उनको देखे जा रहा था। फिर मैंने उसकी टेबल के पास आते हुए पूछा कि और सुनाओ तुम्हारी नौकरी कैसी चल रही है? लेकिन अब मेरी चकित नजरे उसके बूब्स पर ही टिकी हुई थी। अब उसने कहा कि सब कुछ ठीक ही चल रहा है और वो मेरी आँखों को अपनी छाती को घूरते हु देखकर शरमा गई और इतना कहकर तुरंत जाकर उसने अपनी अलमारी को खोलकर एक दुप्पटा ले लिया और उसकी मदद से अपने बूब्स को ढक लिया।

दोस्तों इस काम की वजह से मुझे थोड़ा सा शक हुआ कि उसने मेरी नजरों की हरकत को पढ़ ही लिया, बल्कि दुप्पटा ओढ़कर मुझे जबाब भी दे दिया है। फिर उसने मुझसे पूछा कि घर में मम्मी-पापा और भाई कैसे है? और वो मुझे याद करते है या नहीं? तब मैंने कहा कि हाँ सभी तुम्हें बहुत याद करते है। अब अंजली ने मुझसे पूछा कि आपका यहाँ दिल्ली में कैसे आना हुआ? तब मैंने उसको कहा कि में आज ही अभी एक घंटे पहले ही दिल्ली आया हूँ, में अमानती घर में अपना सामान छोड़कर सीधा तुम्हें देखने आ गया, क्योंकि प्रेम ने मुझसे कहा था कि तुम दस बजे अपने ऑफिस के लिए निकल जाती हो और रात में सात बजे वापस आती हो। अब मेरा काम अगर जल्द ही निपट गया तो में शाम को वापस ग्वालियर चला जाऊंगा और इसलिए में सबसे पहले आपसे मिलने यहाँ आ गया। फिर मैंने उसको एक पैकेट देते हुए कहा कि तुम अपना यह सामान जो तुम्हारे भाई ने दिया है रख लो और मुझे अब जाने की इज़ाज़त दो। अब अंजली ने कहा कि ऐसे कैसे? आप यहीं रुको भाई, मम्मी, पापा जब भी आते है तो वो भी यहीं रुकते है। फिर मैंने उसको कहा कि नहीं अंजली आपको मेरे यहाँ रहने में परेशानी होगी, आपके साथ इस कमरे में एक लड़की भी तो होगी ना।

तभी वो बोली कि वो तो तीन दिन के लिए अपने शहर गई है, इसलिए आजकल में अकेली ही रहती हूँ और उसके ज़िद करने पर में वहीं उसके कमरे पर रुक गया। दोस्तों उसका छोटा कमरा था, जिसमें लेट-बाथ भी उसी कमरे में ही जुड़ा हुआ था और एक छोटी सी रसोई भी थी। फिर उसके बहुत जिद करने पर में उसकी स्कूटी पर उसके साथ स्टेशन गया और अपना सामान वहां से उठा लाया और घर आकर उसके बाथरूम में जाकर फ्रेश हुआ, जहाँ मैंने अंदर पहुंचकर देखा कि उसकी कई ब्रा-पेंटी पड़ी थी, जिन्हें देखकर अब मेरा लंड खड़ा हो गया था। फिर में फ्रेश होकर पजामा और टी-शर्ट पहनकर बाहर आ गया, थोड़ी देर के बाद वो भी फ्रेश होकर जीन्स और टी-शर्ट में आ गई। अब तक हम दोनों के लिए टिफिन सेंटर से खाना आ चुका था, फिर हम लोग खाना खाकर करीब दस बजे अपने-अपने काम पर निकल गये। फिर उसने मुझे अपने कमरे की एक दूसरी चाबी दे दी और कहा कि अगर में जल्दी आ जाऊं तो कमरे पर आकर आराम कर सकता हूँ। अब करीब दोपहर के तीन बजे में अपना काम निपटाकर वापस आया, मुझे उस ऑफिस में कल शाम चार बजे वापस आने को बोला गया और इसलिए मैंने वापस आकर अंजली के कमरे में पहुंचकर कुछ देर बाद उसका कंप्यूटर खोल लिया।

अब सबसे पहले मेरा मन वैसे समय बिताने के लिए इंटरनेट फाइल को देखने का था और फिर जब मैंने इंटरनेट को चालू करके इंटरनेट की कुछ फाइल देखी उसके बाद में बिल्कुल दंग रह गया। दोस्तों मैंने देखा कि उसका पूरा का पूरा कंप्यूटर सेक्स से संबधित वेबसाईट से भरा पड़ा था और मैंने उसका याहू मैसेंजर खोला, तो उसके मैसेंजर में आई.डी और पासवर्ड सेव होने की वजह से उसके नाम से खुल गया। फिर उसके मैसेज इनबॉक्स में जाने पर मुझे पता चला कि वो रात रातभर नेट पर इमैजिनेशन और रोल प्ले का खेल खेलती रहती है। अब मुझे उसके कंप्यूटर में चार सेक्सी फिल्म भी मिली थी, जिसकी वजह से मुझे उसकी इंटरेस्ट की पूरी जानकारी हो गई। अब मैंने मन ही मन सोचा कि इसको चुदाई करने के लिए तैयार करना तो बहुत ही आसान काम है। फिर शाम को करीब छे बजे वो अपने ऑफिस से वापस आ गई और फिर हम लोग चाय पीते हुए ऐसे ही इधर उधर की बातें करते रहे, इस दौरान मेरी आंखे उसके बूब्स और कूल्हों पर ही लगी रही। अब वो भी मेरी पीछा करती आँखों से मेरी हालत को समझकर मन ही मन गरम होने लगी थी। दोस्तों उसकी आँखों में भी सेक्सी का निमंत्रण मुझे साफ नजर आ रहा था, लेकिन हम लोग अभी इतने खुले नहीं थे।

फिर हम लोग रात आठ बजे उसकी स्कूटी से ही घूमने चले गये। अब रास्ते में उसकी स्कूटी के झटकों से उसके बूब्स मेरी पीठ से टकराने लगे, जिसकी वजह से में मन ही मन बहुत खुश होकर उत्साहित भी था। फिर कुछ देर के बाद वो खुद भी जानबूझ कर अपने बूब्स को मेरी पीठ से टकराने लगी थी, क्योंकि अब तक वो भी बहुत गरम हो चुकी थी, लेकिन पहल कौन करे? फिर हम लोग रात को करीब दस बजे एक होटल में खाना खाने पहुंच गये और हम दोनों हल्की-हल्की रौशनी में आमने सामने बैठकर नजरे मिलाकर देखते हुए खाना आने का इंतज़ार कर रहे थे। फिर मैंने धीरे-धीरे अपना एक पैर उसके पैर से टकरा दिया, पहले तो उसने अपना पैर वापस पीछे खीच लिया और थोड़ी देर के बाद भी उसने कोई जवाब नहीं दिया। अब मैंने हिम्मत करके धीरे-धीरे उसके पैर से अपने पैर को रगड़ना शुरू कर दिया, तब उसने भी अब मेरा थोड़ा सा साथ दिया। फिर थोड़ी देर के बाद वो खुद भी अपने पैर को मेरे पैर से रगड़ने लगी थी, जिसकी वजह से पता चला कि उस समय हम दोनों तरफ बराबर का जोश था। फिर हम खाना खाकर करीब एक घंटे के बाद वापस घर के लिए चले, उस समय वो स्कूटी पर दोनों तरफ पैर डालकर बैठ गई और अब उसके बूब्स पूरी तरह से मेरी पीठ से टकरा रहे थे।

फिर थोड़ी देर तक वो अपने बूब्स मेरी कमर से रगड़ती रही, उसके बाद मैंने हिम्मत करके अपना एक हाथ उसकी जांघ पर रख दिया, जिसकी वजह से उसका जोश ज्यादा ही बढ़ गया और इस तरह हम दोनों घर आ गये। फिर मैंने उसको कहा कि अंजली तुम पलंग पर सो जाओ में सोफे पर सो जाता हूँ। तभी अंजली बोली कि सोफा छोटा है और आप लंबे हो, सुबह तक जनाब की कमर अकड़ जाएगी और मेरा पलंग बहुत बड़ा है हम लोग इसी पलंग पर एक साथ सो जाते है। अब में भी मन ही मन यही बात सोच रहा था, मैंने कहा कि हाँ ठीक है जैसा तुम चाहो। फिर में बाथरूम में जाकर पजामा और टी-शर्ट पहन आया और सोने का बहाना करके चुपचाप लेट गया। अब वो भी बाथरूम में जाकर नाइटी पहन आ गई, उसने नाइटी के नीचे ब्रा नहीं पहनी थी। अब छोटे बल्ब की रोशनी में मुझे उसके वो दोनों सुंदर कबूतर साफ झूलते हुए दिख रहे थे। फिर उसके आने पर में सोने का बहाना करके पड़ा रहा और आधी खुली आँखों से उसका स्वभाव देखने लगा। अब वो मुझे सोता हुआ देखकर मुस्कुराई और फिर थोड़ी देर के बाद पलंग के दूसरे किनारे पर आकर लेट गई। दोस्तों उस समय नींद ना उसकी आँखों में थी और ना ही मेरी आँखों में, अब हम दोनों ही सोने का बस एक बहाना करके लेटे थे।

अब मैंने देखा कि मेरी चादर में एक छोटा सा छेद था, जिसको मैंने अपनी आँखों पर कर लिया और अब में उसकी हलचल को बड़े ही ध्यान से देखने लगा। अब वो बार-बार अपनी आंखे खोलकर मुझे देख रही थी, उसकी नजरे बार-बार मेरे तने हुए लंड पर जा रही थी। फिर करीब एक घंटे के बाद वो मेरी तरफ अपनी गांड को करके लेट गई, थोड़ा तिरछा हो जाने से उसकी गांड मुझे चोदने का निमंत्रण दे रही थी, तब में भी थोड़ा सरककर उसके पास पहुँच गया और अपने एक हाथ को लंबा करके उसके शरीर से छु दिया, जिसकी वजह से हम दोनों के शरीर में ही करंट दौड़ गया। अब उसके कोई विरोध नहीं करने से मेरी हिम्मत ज्यादा बढ़ गई और मैंने धीरे से उसकी तरफ करवट लेकर उसकी गांड को छु लिया। दोस्तों पहले तो उसने थोड़ी सी हलचल करना शुरू किया, मैंने अपना हाथ तुरंत पीछे हटा लिया। फिर थोड़ी देर के बाद उसने सोने का बहाना करते हुए अपनी गांड को और पीछे धकेलकर वो मेरे पास एकदम सट गई। अब इस वजह से मेरी हिम्मत और बढ़ गई, मैंने अपने लंड का दबाव उसकी गांड पर देना शुरू कर दिया, लेकिन उसने कोई विरोध नहीं किया। फिर उस वजह से मेरी और भी हिम्मत बढ़ गई और मैंने अपना एक हाथ उसके बूब्स पर धीरे से छु दिया, उसके बूब्स पर अपना हाथ रखते ही उसके पूरे बदन में कपकपी सी होने लगी, लेकिन वो सोने का बहाना करके वैसे ही पड़ी रही।

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अब हम दोनों अपने-अपने चादर के बाहर आ चुके थे, मैंने अपना एक हाथ धीरे-धीरे वापस से उसकी गांड पर पहुँचा दिया और उसकी गांड पर अपना पूरा हाथ फैरकर उसका मुड चैक किया। दोस्तों उसकी तरफ कोई भी जवाब नहीं आने पर मैंने धीरे-धीरे उसकी नाइटी को ऊपर उठाना शुरू कर दिया, उसने पेंटी भी नहीं पहनी थी। फिर मैंने धीरे से अपना लंड बाहर निकालकर उसकी गांड की दरार में धीरे से चिपका दिया और अपना एक हाथ उसकी नाइटी के अंदर डालकर मैंने उसके बूब्स पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। अब उसके बूब्स पर दबाव बनाने से वो थोड़ी कसमसाई, मेरे लंड का दबाव भी उसको पूरा गरम कर रहा था, जिसकी वजह से उसके भी सब्र का बाँध टूट गया था और फिर वो मेरी तरफ घूमकर मुझसे चिपक गई। अब उसने अपने बूब्स को मेरे मुँह से सटा दिया और मेरे लंड को अपने हाथ में ले लिया। तभी मैंने तुरंत उसका एक बूब्स अपने मुँह में लेकर अपने दातों से निप्पल को दबा दिया जिसकी वजह से हुए दर्द से अंजली सिसकियाँ लेते हुए कहने लगी ऊऊऊहह ऊईईईइ ज्यादा ज़ोर से नहीं मुझे दर्द होता है और वो पहली बार मुझसे यह सब बोली थी प्लीज थोड़ा आराम से करो। अब मैंने उसको कहा कि हाँ ठीक है मेरी जान में धीरे करूंगा और फिर हम दोनों उठकर बैठ गये।

अब वो मेरा तना हुआ लंड अपनी ललचाई नज़रों से देखने लगी थी और जोश की वजह से उसके बूब्स भी तनकर पपीते की तरह हो गये थे। फिर मैंने उसकी मैक्सी को अपने हाथों से उतारना चाहा, तब उसने शरमाकर थोड़ा सा विरोध किया, लेकिन उतार लेने दिया और फिर मैंने भी अपना पजामा उतार दिया, जिसकी वजह से हम दोनों अब पूरे नंगे थे। फिर मैंने उसकी गोद में लेटकर उसके निप्पल को अपने मुहं में भरकर उसका रस पीना शुरू किया और वो मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर मुठ मारने लगी। अब हम लोग बहुत जल्दी ही गरम हो गये और फिर मैंने उसको लेटाकर अपने लंड को उसकी चूत में डालने की कोशिश कि, वो अब तक वर्जिन थी और फिर में उसकी चूत के ऊपर ही झड़ गया। अब मेरा लंड अंदर नहीं जा पा रहा था, हम दोनों एक दूसरे से चिपककर बड़ी देर तक ऐसे ही लेटे रहे। फिर थोड़ी देर के बाद वो कहने लगी कि आपने मेरी चूत के ऊपर पूरा गंदा कर दिया है, तब मैंने उठकर उसकी चूत को साफ किया और फिर में उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा। अब अंजली आहे भरते हुए कहने लगी ऊऊह्ह्ह ओह्ह्ह्ह आप यह क्या कर रहे हो? मुझे बड़ी अजीब सी कंपकपी हो रही है। अब वो दोबारा से गरम हो चुकी थी और फिर हम दोनों तुरंत ही 69 आसन में आ गये, मेरा लंड अब उसके मुँह में और मेरी जीभ उसकी चूत में जाकर चाटकर मज़े ले रही थी।

अब हम दोनों पूरी तरह से जोश में आकर तैयार थे, इस बार हम थोड़ा आराम से मज़े लेकर वो सब कर रहे थे, क्योंकि पिछली बार में बाहर ही खाली हो चुका थे इसलिए में आराम से करके बड़े मज़े से रहा था। फिर मैंने उसको कहा कि अपने दोनों पैरो को चौड़ा करो, में अब इसको अंदर डालूँगा। अब अंजली कहने लगी कि नहीं यार मुझे दर्द होता है, तुम ऐसे ही ऊपर से ही करो। फिर मैंने उसको कहा कि नहीं यार प्लीज़ एक बार अंदर भी डालने दो नहीं तो में दोबारा तुम्हें बाहर ही गीला कर दूँगा। अब अंजली बोली कि नहीं यार मुझे बहुत तेज दर्द होगा, अभी जब आपने डाला था तब मुझे बड़ा तेज बहुत दर्द हुआ था। फिर मैंने उसको कहा कि नहीं यार में धीरे-धीरे डालूँगा, प्लीज़ एक बार डालने दो और तब अंजली बोली कि चलो ठीक है एक काम करो पहले फ्रिज से मख्खन का पैकेट उठा लाओ। फिर मैंने फ्रिज से थोड़ा मख्खन निकाला और उसकी चूत के अंदर तक लगा दिया, उसके बाद में उसकी चूत का मख्खन चाटने की कोशिश करने लगा। तभी अंजली बोली कि अभी नहीं, नहीं तो आपका लंड अंदर कैसे जाएगा? मैंने थोड़ा सा मख्खन अपने लंड पर भी लगाया और अपनी पूरी ताक़त से अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया। फिर मेरा आधा लंड अंदर जाते ही वो छटपटाने लगी और बोला कि ऊऊह्ह्ह नहीं, प्लीज़ बहुत दर्द ही रहा है, प्लीज इसको तुम बाहर निकालो मुझे बहुत दर्द हो रहा है।

अब में भी उसका वो दर्द चिल्लाना देखकर डर गया और उसी समय मैंने अपना लंड वापस बाहर निकाल लिया, थोड़ी देर तक उसके बूब्स से खेलने के बाद मैंने दोबारा से उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया और इस बार मैंने अपनी पूरी ताक़त से अपना लंड उसकी चूत के अंदर डाल था। अब अंजली दर्द से तड़पती हुई बोली ऊऊह्ह्ह्ह आईईईईइ माँ मार डाला और ज़ोर की चीख के साथ वो मुझसे लिपट गई। अब मेरा पूरा लंड उसकी चूत के अंदर था और वो दर्द से अपने होंठ को काट रही थी। फिर मैंने धीरे-धीरे उसको धक्के देना शुरू किया और जल्द ही उसकी चूत को अपने वीर्य से भर दिया, अंजली आहहह ऊईईईई माँ करते हुए लगातार सिसकियाँ लेती रही। अब लंड के खाली हो जाने की वजह से उसको बहुत आराम मिला था और वो मुझसे लिपट गई थी, लेकिन में तब तक उसकी वर्जिनिटी को खत्म कर चुका था। फिर थोड़ी देर में मेरा लंड सिकुड़कर बाहर आ गया और उसके साथ में बहुत खून भी बाहर आया था। अब वो बाहर निकलते हुए खून को देखकर बड़ी ही नर्वस हो गई, उसी समय में उसको अपने साथ लेकर बाथरूम में गया और एक रबर के पाईप से दबाव मारकर उसकी चूत को मैंने साफ किया और फिर डिटोल लगाकर मैंने उसकी चूत को साफ़ कर दिय।

दोस्तों वो अब इतनी नर्वस हो चुकी थी कि वो कुछ भी करने की हालत में नहीं थी। फिर मैंने पलंग पर आकर चादर को बदलकर उसको अपने पास में लेटा लिया और फिर हम दोनों एक दूसरे से चिपककर सो गये। फिर सुबह सात बजे मैंने उसको जगाया, उठो अंजली कोई बाहर दरवाजे की घंटी बजा रहा है। तब अंजली बोली कि बाहर दूध वाला होगा, आप ही ले लो में अभी कुछ देर सोना चाहती हूँ और यह कहकर अंजली ने कंबल से अपना पूरा नंगा बदन ढक लिया। अब मैंने जाकर दूध का पैकेट लिया और दूध वाले को कहा कि मेडम ने दो पैकेट देने को कहा है, क्योंकि आज कुछ मेहमान आए है। फिर वो बोला कि हाँ ठीक है और उसने मुझे दो पैकेट दिए और वो वापस चला गया। फिर अंजली ने पूछा कि आपने दो पैकेट क्यों लिए? तब मैंने कहा कि ऐसा मैंने दूध वाले को शक ना हो इसलिए किया है। अब अंजली बोली कि वो सब समझता है इस मल्टी के हर दूसरे फ्लेट में रोजाना किसी का रिश्तेदार आता है और नहीं आता तो वो बाहर से बुला लेती है और फिर उसने हंसकर कहा कि यहाँ ज़्यादातर सर्विस क्लास औरते ही रहती है। फिर मैंने उसकी वो बात सुनकर मुस्कुराते हुए कहा कि तो यह औरतें शादी क्यों नहीं कर लेती? तब अंजली ने हंसकर कहा कि जब बाज़ार में दूध बूथ पर मिलता हो तो घर में भैस क्यों बांधे? आजकल बड़े शहरों में यही सब चलता है।

फिर में पलंग पर वापस आकर अंजली के कंबल में घुस गया और अंजली के बूब्स से बच्चे की तरह दूध पीने लगा। अब अंजली भी मुझे बड़े प्यार से अपना दूध पिलाने का मज़ा लेने लगी थी, मेरा लंड खड़ा होकर अंजली की चूत से टकरा रहा था और अंजली मुझे दूध पिलाने का मज़ा ले रही थी। फिर थोड़ी देर के बाद हम दोनों 69 आसन में आ गये, मैंने अंजली की चूत को चूसकर चाटकर उसको दोबारा से गरम कर दिया और उसने मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर अपने होंठ से अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था। फिर मैंने बहुत गरम होने के बाद उसको कहा कि मुँह में ही निकालने का इरादा है क्या? अब इसको क्या में नीचे डाल दूँ? तब अंजली बोली कि नीचे नहीं, बहुत दर्द होगा में ऐसे ही मुँह से ही कर लूँगी। फिर मैंने कहा कि इस बार इतना दर्द नहीं होगा, बस एक बार करके देखो प्लीज में बहुत ध्यान से धीरे धीरे करूंगा। दोस्तों उसने मेरे बहुत प्यार से समझाने के बाद बहुत डरते हुए मेरा लंड अपने एक हाथ में पकड़कर अपनी चूत पर रख दिया। अब मैंने महसूस किया कि उसकी चूत गरम होने के साथ ही गीली भी हो चुकी थी और थोड़े से दर्द के बाद मेरा लंड अपने गैराज में जा पहुंच गया और अंजली दर्द की वजह से ऊओह्ह्ह प्लीज धीरे-धीरे आहह्ह्ह ऊऊईईईई करने लगी थी।

अब मेरा पूरा लंड उसकी चूत के अंदर जा चुका था, मेरे दोनों हाथों में उसके दोनों बूब्स थे और मेरा लंड पूरा उसकी चूत में जा चुका था। अब हम दोनों बड़े आराम से झटकों का मज़ा लेते हुए सेक्स करने लगे थे। दोस्तों मुझे शाम को चार बजे ऑफिस में बुलाया था और अंजली ने भी अपनी छुट्टी ले ली थी, हम दोनों सुबह के दस बजे तक चुदाई का मज़ा लेकर दस बजे टिफिन वाले के आने पर पलंग से उठे। फिर अंजली ने अपनी नाइटी पहनकर टिफिन लिया और फिर दरवाजा वापस बदन करके हम दोनों बाथरूम में घुस गये और फ्रेश होकर हम दोनों ने एक साथ टब में नहाने का मज़ा लिया और खाना खाते समय टेबल पर भी हम दोनों ने नंगे ही बैठकर दोपहर का खाना खाया। फिर उसी समय अंजली ने मुझे बताया कि उसके साथ रहने वाली लड़की केरल की रहने वाली है और वो दो दिन से अपने एक बॉयफ्रेंड के साथ गई है। फिर जब मैंने उसको पूछा कि तुम्हारे दिल में मेरे साथ सेक्स करने का विचार कैसे आया? तब उसने बताया कि उसके साथ रहने वाली लड़की का दोस्त भी आपकी तरह समझदार है, उसकी उम्र करीब 40 साल के आसपास होगी।

फिर वो उन्हें अपना अंकल कहती है और जब भी उसका सेक्स का मन करता, तब वो उनके साथ चंडीगढ़ चली जाती है और उसका कहना है कि साथ वाले की उम्र ज़्यादा होने से कोई शक भी नहीं करता और ज्यादा उम्र के साथी से सेक्स करने में मज़ा ज़्यादा आता है। अब उसने बताया कि जवान लड़के जल्दी झड़ जाते है और इसलिए वो पूरा मज़ा नहीं देते। फिर अंजली ने कहा कि आपके आने पर मुझे अपने साथ वाली लड़की की वो सभी बातें याद आई और मैंने मन ही मन में सोचा कि क्यों ना में भी एक बार आपके साथ यह सब करने की कोशिश करके देखूं? और इसलिए मैंने आपको रुकने के लिए तैयार किया। अब मैंने हंसते हुए उसको पूछा क्यों अंजली तुम्हे अब मज़ा आ रहा है ना? तब जवाब में उसने मेरी सीट के पीछे से आकर मेरे गले में अपनी बाहों को डाल दिया जिसकी वजह से उसके बूब्स मेरे कंधो पर आ गए और उसने मेरा लंड अपने हाथ में ले लिया और वो हंसते हुए बोली कि मुझे बहुत मस्त मज़ा आया। दोस्तों उस पूरी रात और दिन मैंने जब तक में उसके कमरे पर रहा रुक रुककर में चुदाई के मज़े लेता रहा और चोद चोदकर मैंने उसको पहले से ज्यादा अनुभवी बना दिया।

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अब उसको चुदाई करवाने में डर नहीं बड़ा मज़ा आने लगा था और वो मेरा पूरा पूरा साथ देने लगी थी। फिर में वापस अपने घर आ गया, लेकिन उसके बाद भी हम दोनों ने आगे जब कोई मौका मिला तब बड़े मस्त चुदाई के वैसे ही मज़े लिए ।।

धन्यवाद …

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